ज्योतिष शास्त्र के अनुसार नौ ग्रहों की गणना की जाती है. इसमें सूर्य, चंद्र, बृहस्पति, शुक्र, मंगल, बुध, शनि, मुख्य ग्रह तथा राहु केतु छाया गृह माने जाते है. इन ग्रह में सूर्य, मंगल क्रूर ग्रह तथा शनि राहु केतु ग्रह पाप ग्रह माने जाते है।
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सूर्य - वर्तामान समय में सूर्य कुम्भ राशि में गोचर होने व शनि को अस्त काटने के कारण कुम्भ राशि वालो को कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है। सूर्य 14 मार्च को एक माह के लिए मीन राशि में प्रवेश करेगा जिसके कारण कुम्भ राशि लोगो की सफलता प्राप्त हो सकती है। मीन राशि में सूर्य के द्वारा बुध अस्त व राहु गोचर के कारण कठिनाइयों का सामना बढ़ेगा परिवार में मतभेद बढ़ सकते है।
उपाय - आदित्य हृदय स्तोत्र पाठ, रुद्राभिषेक शनि चालीसा पाठ करें।
मंगल - वर्तमान समय में मंगल मकर राशि घनिष्ठा नक्षत्र - 2 में गोचर कर रहा है, 15 मार्च 2024 को कुम्भ राशि प्रवेश होगा। मंगल मकर राशि में उच्च होने के कारण मकर राशि के लोगो को सफलता प्रदान करता हैं। कुम्भ राशि आने पर शनि की राशि व शत्रु राशि में आने के कारण शत्रुओ का भय व कई कार्यो में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
उपाय - सुन्दरकाण्ड पाठ, हनुमान जी की आराधना व पान चढ़ाएं।
बुध - बुध ग्रह वर्तमान समय में मीन राशि में गोचर कर रहा है जो 28 मार्च 2024 तक रहेगा। मीन राशि में राहु गोचर व शनि की साढ़ेसाती होने के कारण बुध नीच अवस्था के कारण कम फलदाई रहेगा सूर्य के मीन में आने पर कुछ कार्यो में सफलता प्राप्त की जा सकती है।
उपाय - आदित्य हृदय स्तोत्र पाठ - विष्णु सहस्त्र नाम पाठ व प्रति दिन सूर्य अर्ध प्रदान करे।
चन्द्रमा - चन्द्रमा है चन्द्रमा पृथ्वी का ही उपग्रह है। तीव्र गति एवं पृथ्वी के सब ग्रहों में निकटतम होने के कारण इसका कुंडली पर प्रभाव बहुत ही महत्त्व रखता है। जितना यह बलवान होता है उसी तरह ही शरीर पर एवं मन पर प्रभाव डालता है। पूर्ण चन्द्र शुभ फल देता है। तथा क्षीण चन्द्र अशुभ माना जाता है। यह सभी राशियों की परिक्रमा 27-324 दिनों मैं पुरा कर लेता है।
चन्द्रमा की कल्पनाशक्ति, माता, दूध, पानी, शरीर बाई आँख, केकड़े, खून, जीवन, स्वाभाव पद आयु, भय, धन-दौलत, रत्न, चांदी, राज- सम्मान, मन यात्रा, समाचार, लघु उद्योग आदि में प्रभाब देता है।
गुरु - बृहस्पति वर्त्तमान समय में मेष राशि में गोचर कर रहा है इनकी एक राशि में गोचर अवधि लगभग एक वर्ष रहती है। जो 1 मई 2024 को राशि परिवर्तन करेंगे।
उपाय - भगवान विष्णु व अपने ईस्ट देव की आराधना करें। सत्य नारायण पूजा या विष्णु सहस्रनाम करें।
शनि - शनि वर्त्तमान समय में कुम्भ राशि में गोचर कर रहा है। एक राशि में शनि 2.5 वर्ष गोचर करता है। वक्री व मार्गी होते हुए फलादेश में परिवर्तन रहता है। शनि स्वराशि होने के कारण अशुभ ग्रहों की दृष्टि न पड़ने पर अधिक फलदाई रहता है।
उपाय - हनुमान चालीसा का जाप करें और शनि उपासना करनी चाहिए।
पूजा - हनुमान चालीसा पाठ या सुन्दरकाण्ड पाठ करवाएं
राहु - वर्तमान समय में राहु मीन राशि में गोचर कर रहा है। जिसकी गोचर अवधि डेढ़ वर्ष रहती है। जो 18 मई 2025 तक रहेगा।
उपाय - अपने इष्ट देव की पूजा राहु मंत्र ॐ रां राहवे नमः मंत्र जपें। राहु शांति अनुष्ठान करवाएं
केतु - वर्त्तमान समय में केतु कन्या राशि में गोचर कर रहा है। एक राशि में समय अवधि डेढ़ वर्ष रहती है। जो 18 मई 2025 तक रहेगा।
उपाय - गणेश जी व विष्णु उपासना करनी चाहिए गणेश अथर्व शीर्ष पाठ या केतु शान्ति पाठ करवाएं ।
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