सरल शब्दों में, मृत्यु कैलकुलेटर (Death Calculator) एक ऑनलाइन टूल या ज्योतिषीय विधि (astrological method) है जो विभिन्न कारकों के आधार पर किसी व्यक्ति की मृत्यु का समय और संभावित कारणों का अनुमान लगाती है। इसमें आपके ज्योतिषीय चार्ट (astrological chart), स्वास्थ्य स्थिति और कभी-कभी केवल गणितीय संभावनाओं को शामिल किया जाता है। हालांकि, कई ऑनलाइन मृत्यु कैलकुलेटर केवल मनोरंजन के लिए बनाए जाते हैं, लेकिन कुछ वैदिक ज्योतिषीय पद्धतियाँ (ancient Vedic astrology) कहीं अधिक गहरी और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित होती हैं।
यदि आपने कभी मुफ्त मृत्यु कैलकुलेटर ऑनलाइन (Free Death Calculator online) देखा है, तो आपको पता होगा कि यह कैसे काम करता है। इसमें आपको आयु, लिंग, आदतें (जैसे धूम्रपान या शराब सेवन), और कभी-कभी स्वास्थ्य स्थिति जैसी बुनियादी जानकारी भरनी होती है, और यह एक अनुमानित मृत्यु तिथि या कारण बताता है। ऐसे उपकरण केवल मनोरंजन के उद्देश्य से बनाए जाते हैं और इन्हें गंभीरता से नहीं लिया जाना चाहिए। हालांकि, जब हम ज्योतिष की बात करते हैं, तो मृत्यु कैलकुलेटर (Death Calculator) एक गहरी और रहस्यमयी भूमिका निभाता है।
ज्योतिष (Jyotish) में, मृत्यु का अनुमान ग्रहों की स्थिति (planetary positions), गोचर (transits), और कुंडली (Kundli) के कुछ विशेष भावों के आधार पर लगाया जाता है। आइए ज्योतिषीय दृष्टिकोण से और गहराई से समझें।
वैदिक ज्योतिष (Vedic Jyotish) में ग्रहों की स्थिति (Position of Planets) व्यक्ति के जीवन से जुड़ी कई जानकारियां प्रकट कर सकती है, जिसमें उनकी मृत्यु भी शामिल है। कुछ खास ग्रह ऐसे होते हैं, जिनका ज्योतिषी (Astrologer/Jyotish) विशेष रूप से अध्ययन करते हैं ताकि मृत्यु से संबंधित संकेतों को समझा जा सके।
कुंडली में इन ग्रहों की स्थितियों और उनके प्रभावों को समझकर मृत्यु के संभावित समय और प्रकार का अनुमान लगाया जा सकता है। हालांकि, ज्योतिष (Jyotish) यह भी मानता है कि ये केवल संभावनाएं होती हैं, क्योंकि मानव का स्वतंत्र निर्णय (Free will) हमेशा परिणामों को प्रभावित करता है।
ज्योतिष में कुंडली के कुछ भावों (houses) को मृत्यु की भविष्यवाणी/पूर्वानुमान करने के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। प्रत्येक भाव जीवन के किसी न किसी पहलू को दर्शाता है, और कुछ भाव (House) सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से मृत्यु से जुड़े होते हैं। आइए उन महत्वपूर्ण भावों को समझें, जिन्हें ज्योतिषी मृत्यु के संभावित समय या कारण की व्याख्या में ध्यान में रखते हैं।
आठवां भाव ज्योतिष में (8th House in Astrology) मृत्यु और परिवर्तन के भाव के रूप में जाना जाता है। यह भाव मृत्यु, उत्तराधिकार, रहस्यों और गहरे मानसिक परिवर्तनों से संबंधित मामलों को शासित करता है। यदि इस भाव पर शनि, राहु या मंगल जैसे अशुभ ग्रह का प्रभाव होता है, तो यह अचानक या चुनौतीपूर्ण मृत्यु का संकेत दे सकता है।
उदाहरण के लिए:
हालांकि आठवां भाव (8th House) अपनी डरावनी धारणाओं के लिए जाना जाता है, यह पुनर्जन्म और आध्यात्मिक परिवर्तन का भी प्रतीक है, जो हमें याद दिलाता है कि मृत्यु जीवन के चक्र का सिर्फ एक हिस्सा है।
अष्टम भाव की तुलना में तीसरा भाव (3rd house) भी मृत्यु से जुड़ा होता है, लेकिन इसका प्रभाव अलग तरीके से होता है। तीसरा भाव साहस, छोटे सफर, भाई-बहनों और आपके निकटतम परिवेश का प्रतिनिधित्व करता है। इस भाव का मृत्यु पर प्रभाव मुख्य रूप से दुर्घटनाओं या यात्रा के दौरान होने वाली मृत्यु से जुड़ा होता है।
यह भाव मुख्य रूप से बाहरी कारणों से हुई मृत्यु को दर्शाता है, विशेष रूप से यात्राओं, पड़ोसियों या आसपास के परिवेश से जुड़े खतरों को। यदि इस भाव में स्थित ग्रह अशुभ स्थिति में हों, तो वे अल्पायु या अचानक संकट का संकेत दे सकते हैं।
वैदिक ज्योतिष में मृत्यु योग (Mrityu Yog) एक महत्वपूर्ण अवधारणा है, जो अकाल मृत्यु या जीवन के लिए गंभीर खतरे को दर्शाती है। जब कुछ विशेष ग्रहों की युति (Grahon ki yuti) या दृष्टि से मृत्यु योग बनता है, तो व्यक्ति को मृत्यु से संबंधित चुनौतियों या जीवन-धमकाने वाली स्थितियों का सामना करना पड़ सकता है। विशेष रूप से जब अशुभ ग्रह (शनि, राहु, केतु, मंगल) अष्टम भाव, तृतीय भाव, या द्वादश भाव (हानि का भाव) से जुड़ते हैं, तो मृत्यु योग के संकेत मिल सकते हैं।
ज्योतिषी (Jyotishi) महादशा (Mahadasha) या गोचर के दौरान मृत्यु योग (Yog of Mrityu) की जांच करते हैं ताकि यह समझा जा सके कि व्यक्ति किसी गंभीर संकट या जीवन-धमकाने वाली घटना का सामना कर सकता है या नहीं। हालांकि, हर मृत्यु योग मृत्यु का कारण नहीं बनता, बल्कि यह व्यक्ति के जीवन में बड़े बदलावों, संघर्षों, या खतरनाक स्थितियों को भी दर्शा सकता है।
यह शाश्वत प्रश्न है: 'मैं कब मरूंगा?'। हममें से कई लोगों ने कभी न कभी इस बारे में जरूर सोचा होगा, और इसी जिज्ञासा के चलते लोग ज्योतिषियों, मनोविज्ञानियों (Psychics), या ऑनलाइन मृत्यु कैलकुलेटर (Online Death Calculators) की ओर आकर्षित होते हैं। लेकिन ज्योतिष हमें बताती है कि मृत्यु जीवन का केवल एक पहलू है और यह रहस्यमय बनी रहती है।
मृत्यु का सबसे बड़ा रहस्य इसके समय में नहीं, बल्कि इसकी अनिश्चितता में है। हालांकि, ज्योतिषीय गणना ग्रहों की स्थिति (planetary positions), गोचर, और कुंडली के विशेष भावों (houses in Kundli) के आधार पर संकेत दे सकती है, लेकिन यह सटीक रूप से मृत्यु का समय बताने में असमर्थ होती है। ऐसा इसलिए क्योंकि ज्योतिष मनुष्य की स्वतंत्र इच्छा (Free Will) और कर्म के प्रभाव को स्वीकार करती है। अगर किसी व्यक्ति की कुंडली (Kundali/ Birth chart) में अकाल मृत्यु के योग (Akal Mrityu Yog) हैं, तो भी उनके कर्म, आध्यात्मिक उन्नति, और जीवनशैली के सुधार से इसे प्रभावित और बदला जा सकता है।
ज्योतिष संभावनाओं की खिड़की खोलती है न कि निश्चितताओं की। यही इसकी सबसे बड़ी खूबसूरती है – यह हमें सचेत रूप से जीने, अपने जीवन के विकल्पों को सुधारने, और यह स्वीकार करने का अवसर देती है कि मृत्यु, जब भी आए यह जीवन का स्वाभाविक हिस्सा है।
अगर पंचम, दशम तिथि, पूर्णिमा या अमावस्या तिथि शनिवार को आती है, तो इसे अशुभ मृत्यु योग (Mrityu Yoga) कहा जाता है। यह योग व्यक्ति के जीवन में गंभीर संकट या अकाल मृत्यु के संकेत दे सकता है।
नीचे स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए 5 सुझाव दिए गए हैं।
नोट: यह जानकारी केवल मनोरंजन के उद्देश्य से दी गई है। इसे किसी वैज्ञानिक या चिकित्सा तथ्य के रूप में न लें।
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